उत्तराखंड में सड़क हादसों पर लगाम की तैयारी: हर जिले में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर,चालान राशि की हिस्सेदारी जाएगी बढ़ाई

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देहरादून। उत्तराखंड में सड़क हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाने और दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित राहत पहुंचाने के लिए परिवहन विभाग ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। अब प्रदेश के सभी जिलों में सड़क सुरक्षा समन्वयक तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही 'सड़क सुरक्षा कोष' को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए वाहनों के चालान से मिलने वाली राशि की हिस्सेदारी को बढ़ाकर सीधा दोगुना (60 प्रतिशत) करने की तैयारी है। परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में शासन को औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है।

उत्तराखंड में लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों को रोकने और दुर्घटना के बाद घायलों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने जा रही है। अब हर जिले में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर तैनात करने की तैयारी है। इसके साथ ही सड़क सुरक्षा कोष को मजबूत करने के लिए चालान से मिलने वाली राशि में सरकार की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। परिवहन मुख्यालय की ओर से तैयार प्रस्ताव के मुताबिक, वर्तमान में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से वसूली गई चालान राशि का 30 प्रतिशत सड़क सुरक्षा कोष में जमा किया जाता है। इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इससे सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध धनराशि दोगुनी हो सकेगी। उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए फरवरी से पीएम राहत योजना लागू है, लेकिन अब तक केवल सात लोग ही इसका लाभ उठा सके हैं। योजना का लाभ अधिक से अधिक दुर्घटना पीड़ितों तक पहुंचाना परिवहन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। इसी को देखते हुए जिलों में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर तैनात करने की तैयारी की जा रही है। ये अधिकारी सड़क हादसे में घायल लोगों को योजना के तहत इलाज की सुविधा दिलाने में मदद करेंगे। साथ ही दुर्घटना के बाद जरूरी औपचारिकताओं और संबंधित विभागों के बीच समन्वय में भी भूमिका निभाएंगे। रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी केवल उपचार तक सीमित नहीं रहेगी। हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिलाने, पुलिस और परिवहन विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यों के क्रियान्वयन में भी इनकी भूमिका होगी। परिवहन विभाग का मानना है कि जिलास्तर पर एक जिम्मेदार अधिकारी की तैनाती होने से दुर्घटना के बाद पीड़ितों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में होने वाली देरी कम होगी। साथ ही सड़क सुरक्षा से जुड़े अभियानों और सुधारात्मक उपायों की निगरानी भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। सड़क सुरक्षा कोष में चालान राशि की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशों के क्रम में तैयार किया गया है। विभाग का मानना है कि कोष में अधिक राशि उपलब्ध होने से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जरूरी सुधार, सुरक्षा उपाय और अन्य सड़क सुरक्षा कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, जिलों में रोड सेफ्टी कोऑर्डिनेटर की तैनाती और चालान राशि की हिस्सेदारी बढ़ाने दोनों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जिलास्तर पर समन्वय मजबूत करना जरूरी है। सरकार की इस पहल से एक ओर सड़क सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर हादसे के बाद पीड़ितों को सरकारी सहायता और इलाज का लाभ दिलाने की व्यवस्था भी अधिक प्रभावी हो सकती है। अब प्रस्ताव पर शासन की मंजूरी का इंतजार है।