हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब मां गंगा के पौराणिक इतिहास को और नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा। नगर निगम की पहल पर देवपुरा चौक स्थित भूमि पर भव्य गंगा म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। शासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी देते हुए 10 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत कर दी है। लक्ष्य है कि आगामी कुंभ से पहले म्यूजियम का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। मेयर किरण जैसल के प्रस्ताव पर स्वीकृत इस परियोजना के तहत नगर निगम की चिन्हित भूमि पर चार स्तरीय भवन तैयार किया जाएगा। सबसे निचले तल पर पार्किंग की सुविधा विकसित की जाएगी, जबकि उसके ऊपर तीन मंजिलों में अत्याधुनिक गंगा म्यूजियम स्थापित होगा। इस म्यूजियम में गंगा अवतरण से लेकर कुंभ मंथन, भगीरथ की तपस्या, दक्ष प्रजापति प्रसंग, देवी सती की कथा और भगवान शिव की लीलाओं तक का सजीव और आकर्षक चित्रण किया जाएगा।
इसके अलावा पांडव लीलाएं, सप्त सरोवर, मच्छला कुंड, ब्रह्मकुंड और हरकी पैड़ी के महत्व को भी विस्तार से दर्शाया जाएगा। चंडी देवी, मनसा देवी, श्री दक्षिण काली, मायादेवी, शीतला माता और सुरेश्वरी देवी जैसे प्रमुख मंदिरों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएगा। कांवड़ यात्रा के इतिहास और हरिद्वार की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने की योजना है, ताकि युवा पीढ़ी भी अपनी परंपराओं से जुड़ सके। परियोजना की कार्यदायी संस्था के रूप में पेयजल निगम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मार्च से निर्माण कार्य शुरू कर कुंभ तक इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नगर निगम की इस बेशकीमती भूमि पर लंबे समय से भूमाफिया की नजर थी, लेकिन अब यहां सार्वजनिक हित में पार्किंग और गंगा म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा। गौरतलब है कि वर्ष 2010 के महाकुंभ के दौरान भी गंगा म्यूजियम बनाने की योजना बनी थी, परंतु वह साकार नहीं हो सकी। अब शासन की स्वीकृति और बजट जारी होने के बाद यह बहुप्रतीक्षित परियोजना धरातल पर उतरने जा रही है। यह म्यूजियम न केवल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का नया केंद्र बनेगा, बल्कि हरिद्वार के धार्मिक पर्यटन को भी नई पहचान देगा।

