ईरान-अमेरिका संघर्ष से वैश्विक व्यापार मार्गों पर खतरा

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नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान पर कई हमले किए गए, जिनके जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया है। इस बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता की कोशिशें जरूर हुई हैं, लेकिन अब तक युद्ध को लेकर कोई ठोस बातचीत संभव नहीं हो सकी है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत की चर्चा सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डेलिगेशन भेजने की बात कही है, लेकिन ईरान की ओर से अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। ईरान, ट्रंप की धमकियों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज म अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर नाराज है और उसने पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और संकट अभी टला नहीं है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान बात चीत करने वाला है, नहीं तो उसे ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जैसा उसने पहले कभी नहीं देखा। ट्रंप ने यह द जॉन फ्रेडरिक्स शो में फोन इंटरव्यू के दौरान कहा। इधर इंटर नेशनल मैरीटाइम ऑर्गेना इजेशन के प्रमुख ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नेविगेशन की स्वतंत्रता के समर्थन में खड़े देश सही संदेश दे रहे हैं। 

हॉर्मुज संकट का विकल्प तलाश रहे खाड़ी देश, नई रणनीति पर कर रहे काम
तेहरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है। इस वजह से खाड़ी क्षेत्र के देश खासकर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब अब इस रास्ते पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें, तेल और गैस की सप्लाई इस समुद्री रास्ते पर काफी निर्भर है। अगर इसमें कोई रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए ये देश अब नए बंदरगाह, पाइपलाइन और दूसरी सुविधाएं बना रहे हैं ताकि भविष्य में इस रास्ते पर उनकी निर्भरता कम हो सके। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलमार्ग से होकर गुजरने वाले समुद्री यातायात में अभूतपूर्व ठहराव आया है। यह ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है। जिससे होकर वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का लगभग पांचवां हिस्सा यहां से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने खाड़ी देशों को पुरानी पाइपलाइनों को पुनर्जीवित करने और नई पाइपलाइनें बनाने के लिए सहयोग और समन्वय करने का पर्याप्त कारण दिया है। क्षेत्र से मिली रिपोर्टों के अनुसार, इस दिशा में प्रारंभिक प्रयास पहले से ही शुरू हो चुके हैं।