उत्तराखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित लोकायुक्त कानून लागू होने की उम्मीदें बढ़ीं, शासन स्तर पर तैयारी

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देहरादून। उत्तराखंड में लंबे समय से प्रतीक्षित लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए योग्य उम्मीदवारों के चयन हेतु पांच सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन कर दिया है। इस निर्णय के साथ ही प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर चल रही प्रतीक्षा समाप्त होने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के सचिव शैलेश बगौली द्वारा शनिवार को जारी आदेश के अनुसार नैनीताल हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आलोक वर्मा को सर्च कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति में प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्वों को शामिल किया गया है, ताकि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पूरी की जा सके। समिति के अन्य सदस्यों में उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पाण्डे, पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी तथा दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल को शामिल किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों की मौजूदगी से समिति के कार्य को व्यापक दृष्टिकोण और विशेषज्ञता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकारी आदेश के अनुसार यह सर्च कमेटी लोकायुक्त अधिनियम की धारा 4(4) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के पदों के लिए उपयुक्त नामों का पैनल तैयार करेगी। समिति द्वारा तैयार किए गए नामों को अंतिम चयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मुख्य चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य चयन समिति में मुख्यमंत्री के अलावा विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और अन्य निर्धारित सदस्य शामिल होते हैं। अंतिम निर्णय इसी समिति द्वारा लिया जाएगा। सरकार की ओर से सर्च कमेटी के गठन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और चयन समिति से जुड़े सभी सदस्यों को भेज दी गई है। इसमें हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी को भी सूचनार्थ प्रतिलिपि प्रेषित की गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकायुक्त को भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली प्रमुख संस्था माना जाता है। ऐसे में लंबे समय से लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्च कमेटी के गठन के बाद अब चयन प्रक्रिया में तेजी आएगी और जल्द ही लोकायुक्त अध्यक्ष तथा सदस्यों के नामों पर अंतिम निर्णय संभव हो सकेगा। इससे राज्य में जवाबदेह प्रशासन और पारदर्शी शासन व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। धामी सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सुधारों और संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें सर्च कमेटी की सिफारिशों और उसके बाद होने वाले अंतिम चयन पर टिकी हैं, जिससे उत्तराखंड को जल्द नया लोकायुक्त मिल सकता है।