शिक्षा और संस्कारों से ही बनेगा सशक्त राष्ट्र: ‘ज्ञान गंगा सम्मान में गरजे सीएम धामी, उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान और मेधावियों को बांटी छात्रवृत्ति

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देहरादून। कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'ज्ञान गंगा सम्मान 2026 एवं छात्रवृत्ति वितरण समारोह' का शुभारंभ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले उत्कृष्ट शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया, वहीं आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभावान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण और समाज की दिशा तय करने का सबसे मजबूत आधार है। शिक्षक नई पीढ़ी के भविष्य निर्माता हैं और आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभावान विद्यार्थियों को अवसर देकर समाज उनके सपनों को उड़ान दे सकता है। यह संदेश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ज्ञान गंगा सम्मान 2026 एवं छात्रवृत्ति वितरण समारोह में दिया। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। वहीं जरूरतमंद और प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। समारोह में शिक्षाविदों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर सोसायटी की ओर से शिक्षा एवं छात्र हित में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दी जा रही छात्रवृत्ति उनके बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि बच्चों को अपने सपने पूरे करने और आगे बढ़ने का हौसला देने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे प्रयास लगातार होने चाहिए, जिनसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक वास्तव में भविष्य निर्माता हैं। उनके हाथों में आने वाली पीढ़ी के निर्माण की जिम्मेदारी होती है। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने, उन्हें सही दिशा देने और उनके व्यक्तित्व को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिक मूल्य, जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकारों की समझ भी जरूरी है। ज्ञान और संस्कार के समन्वय से ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकता है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी बच्चों की बदलती सोच और भावनाओं को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों पर केवल अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। उनकी रुचि, प्रतिभा और भावनाओं को समझकर आगे बढ़ने के लिए उचित वातावरण देना जरूरी है। उन्होंने बेटियों को बेटों के समान अवसर देने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभा किसी वर्ग या लिंग तक सीमित नहीं होती। अवसर मिलने पर बेटियां भी हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर सकती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की मजबूत नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था से तैयार होती है। शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर ज्ञान के साथ विचार और संस्कार विकसित करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा का सदुपयोग करते हुए लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। कैबिनेट मंत्री खजान दास ने शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ सामाजिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से शिक्षा को और व्यापक बनाया जा सकता है। समारोह में प्रोफेसर डॉ. सुधा रानी पांडे, फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, अनिल गोयल, पुनीत मित्तल, ओपी उनियाल, दशरथ कश्यप समेत शिक्षाविद, शिक्षक, विद्यार्थी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान और प्रतिभावान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरण समारोह का मुख्य आकर्षण रहा। आयोजन ने शिक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी और जरूरतमंद प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का मजबूत संदेश दिया।