देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। तड़के सुबह से ही राजधानी देहरादून सहित प्रदेशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे और हजारों भक्तों ने भगवान आशुतोष का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।भक्तों ने शिवलिंग पर पंचामृत, गंगाजल, बेलपत्र, सफेद पुष्प, आक के फूल, कमलगट्टा, दूध, दही और शहद अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व शिव और शक्ति की आराधना का प्रतीक है। यह हमें प्रेम, एकता और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत विशेष माना जा रहा है। कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात जैसे दुर्लभ योग एक साथ बन रहे हैं। नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार, भगवान शिव की पूजा तीन प्रकार—सात्विक, राजसिक और तामसिक—से की जाती है। सात्विक पूजा में दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र और फल अर्पित किए जाते हैं, जबकि राजसिक और तामसिक पूजा में भांग, धतूरा, रुद्राक्ष व भस्म श्रृंगार का विशेष महत्व है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर की गई आराधना विशेष फलदायी होती है। यही कारण है कि देवभूमि में श्रद्धा और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला।

