उत्तराखंड के निवासियों को याद दिलाना: सर्वेक्षण टीमों द्वारा सौंपे गए गणना दस्तावेजों को सत्यापित कर वापस करें

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देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिहीन और अपडेटेड बनाने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी कमर कस ली है। प्रदेश में आगामी 29 मई से चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कड़े लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्देशों के तहत राज्य में 29 मई से 7 जून तक जिलावार एसआईआर का सघन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

राज्यस्तरीय मास्टर ट्रेनरों की तैयारी पूरी होने के बाद अब जिला स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही एसआईआर के 'गणना प्रपत्र' भरने का मुख्य काम भी शुरू हो जाएगा। आगामी 8 जून से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) अपने सहायकों के साथ राज्य के प्रत्येक घर-द्वार पर पहुंचेंगे। बीएलओ के पास ये गणना प्रपत्र होंगे, जिन्हें पूरी तरह भरकर मतदाताओं को वापस बीएलओ को सौंपना होगा। आयोग का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का कोई भी घर या पात्र मतदाता इस प्रक्रिया से न छूटे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा की जा रही जिलावार समीक्षा में एक बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य में अब तक करीब 89 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। हालांकि, 11 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान वर्ष 2003 की पुरानी मतदाता सूची से नहीं हो पाया है। ऐसे में, इन 11 फीसदी मतदाताओं को मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रखने यानी 'वोट बचाने' के लिए वर्ष 2003 का वैध रिकॉर्ड या साक्ष्य बीएलओ को उपलब्ध कराना होगा। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि इस महाअभियान को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी हैं। प्रशिक्षण के दौरान बीएलओ से लेकर उनके उच्चाधिकारियों को एसआईआर की सभी तकनीकी बारीकियां, प्रपत्रों का सत्यापन और दावों व आपत्तियों से जुड़ी 'अपील की प्रक्रिया' को विस्तार से समझाया जाएगा। यदि आप भी उत्तराखंड के मतदाता हैं, तो 8 जून से आने वाले बीएलओ को सही जानकारी देकर इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपना सहयोग अवश्य दें।