उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश के लगभग दस लाख छात्र-छात्राओं को इस शैक्षणिक वर्ष में मुफ्त कॉपियां नहीं मिल सकीं। सरकार ने अप्रैल 2025 में कैबिनेट बैठक के दौरान सरकारी और अशासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मुफ्त कॉपियां देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद शिक्षा विभाग समय पर टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं कर सका, जिसका खामियाजा बच्चों को पूरे साल इंतजार के रूप में भुगतना पड़ा। शिक्षा विभाग ने इससे पहले छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की थी। इसी क्रम में मुफ्त कॉपियों की घोषणा की गई थी, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में बड़ी उम्मीद जगी थी। लेकिन शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक कॉपियां नहीं मिलने से कई छात्र-छात्राओं को बाजार से कॉपियां खरीदनी पड़ीं। इससे खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
अब शिक्षा विभाग ने इस योजना को अगले सत्र में लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए छात्र-छात्राओं को मुफ्त कॉपियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए चार दिसंबर 2025 को ऑनलाइन ई-निविदा आमंत्रित की गई है, ताकि समयबद्ध तरीके से कॉपियों की खरीद और वितरण सुनिश्चित किया जा सके।विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस बार टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा कर लिया जाएगा, जिससे अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही छात्रों को कॉपियां उपलब्ध हो सकें। शिक्षा विभाग का दावा है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से छात्रों की पढ़ाई में सुविधा होगी और अभिभावकों का आर्थिक बोझ भी कम होगा। हालांकि, इस वर्ष योजना के धरातल पर नहीं उतर पाने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी थी, तो टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

