देहरादून। उत्तराखंड की कानून व्यवस्था और जनसंख्या संतुलन को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता जताते हुए धामी सरकार को सतर्क रहने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि हालात अभी नियंत्रण से बाहर नहीं हैं, लेकिन जिस प्रकार लगातार गंभीर अपराध सामने आ रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। रावत ने कहा कि “खराब सुरक्षा की रेल अभी पटरी से नहीं उतरी है, लेकिन ट्रैक पर दबाव जरूर बढ़ गया है।” राजधानी देहरादून समेत कई जिलों में हत्या, लूट और डकैती जैसी वारदातों में वृद्धि को उन्होंने चिंताजनक बताया। उनका कहना था कि अपराध केवल आंकड़ों का विषय नहीं होता, बल्कि इससे आम जनता के मन में भय और असुरक्षा की भावना घर कर जाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत, धार्मिक और पर्यटन प्रधान राज्य में अपराध का बढ़ता ग्राफ राज्य की छवि को भी प्रभावित करता है। हरिद्वार और देहरादून जैसे शहरों में देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था मजबूत रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। रावत ने पुलिस तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि समय रहते चेताना है। उन्होंने कहा कि यदि अभी से ठोस कदम उठाए जाएं तो हालात पूरी तरह नियंत्रण में रखे जा सकते हैं। उन्होंने जिला स्तर पर पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और सुरक्षा तंत्र की नियमित समीक्षा करने की मांग भी की। देहरादून में हाल के दिनों में हुई हत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए रावत ने कहा कि ऐसी वारदातें समाज को झकझोर देती हैं और कानून के प्रति लोगों का विश्वास डगमगाने लगता है। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और त्वरित न्याय व्यवस्था आवश्यक है, ताकि कानून का भय बना रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अपराधियों में कानून का डर समाप्त हुआ तो स्थिति धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठने की अपील करते हुए रावत ने कहा कि कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सभी दलों को एकजुट होकर सरकार का सहयोग करना चाहिए। यह केवल किसी एक दल या सरकार का विषय नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द का प्रश्न है। कानून व्यवस्था के साथ-साथ रावत ने राज्य में डेमोग्राफी चेंज यानी जनसंख्या संरचना में बदलाव के मुद्दे पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में राज्य गठन के समय उपलब्ध आंकड़ों के अध्ययन में यह संकेत मिले थे कि कुछ समुदायों की जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे विषय संवेदनशील होते हैं, इसलिए इन पर तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जनसंख्या से जुड़े विषयों पर पारदर्शिता बरती जाए और समय-समय पर आंकड़ों का विश्लेषण कर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए। रावत ने कहा कि डेमोग्राफी को लेकर प्रदेश में चर्चाएं तेज हो रही हैं, ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह सामाजिक संतुलन और सौहार्द बनाए रखने के लिए गंभीर पहल करे। रावत ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान शांति, आध्यात्म और भाईचारे की रही है। इस छवि को किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कानून व्यवस्था और जनसंख्या से जुड़े विषयों पर संतुलित, गंभीर और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। समाज की सक्रिय भागीदारी, जनजागरूकता और सामुदायिक सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। यदि पुलिस, प्रशासन और आम जनता मिलकर कार्य करें तो राज्य में शांति और सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है। जहां एक ओर इसे सरकार के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल रावत का स्पष्ट संदेश है कि समय रहते सतर्कता बरतना ही प्रदेश के हित में है। उन्होंने अंत में कहा कि उत्तराखंड विकास की राह पर अग्रसर है, लेकिन कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन मजबूत रहेगा तभी यह विकास टिकाऊ और प्रभावी साबित होगा। सरकार को चाहिए कि सुरक्षा और जनसंख्या जैसे संवेदनशील विषयों पर गंभीर, पारदर्शी और दूरदर्शी नीति अपनाए, ताकि राज्य की शांति और प्रगतिशील छवि बरकरार रह सके।

