ED का कड़ा रुख: तीन हफ्ते की राहत खारिज, पूर्व मंत्री उरांव से पूछताछ

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रांची। झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई अब अपने सबसे अहम पड़ाव पर पहुँच चुकी है। राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव मंगलवार को तय समय पर रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के जोनल कार्यालय में पेश हुए। केंद्रीय जांच एजेंसी के दूसरे समन के बाद पहुंचे पूर्व मंत्री से जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के तुरंत बाद अधिकारियों ने तीखे सवालों की बौछार शुरू कर दी।

ईडी दफ्तर पहुँचने पर मीडियाकर्मियों ने पूर्व वित्त मंत्री को घेर लिया और कई सवाल दागने चाहे, लेकिन रामेश्वर उरांव ने बाहर किसी भी सवाल का सीधा जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा, "मैं 25 साल तक पुलिस सेवा में रहा हूँ। कोई भी गवाह बाहर बयान नहीं देता है। हमें जो भी कहना है, हम अंदर कहेंगे। उनका यह बयान राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में ईडी ने रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को पहले भी तलब किया था। जांच एजेंसी ने रोहित उरांव को 29 जून और रामेश्वर उरांव को 30 जून को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन दोनों ही नेता निर्धारित तारीख पर उपस्थित नहीं हुए। दोनों ने ईडी से अपनी तैयारी और अन्य कारणों का हवाला देते हुए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए ईडी ने उनके इस अनुरोध को आंशिक रूप से ही स्वीकार किया। एजेंसी ने तीन सप्ताह के बजाय सिर्फ एक सप्ताह (सात दिन) का वक्त दिया और दूसरा समन जारी कर दिया। नए समन के मुताबिक, रोहित उरांव को 6 जुलाई और पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव को 7 जुलाई को हाजिर होने का कड़ा निर्देश दिया गया था। निर्देशों का पालन करते हुए बीते सोमवार (6 जुलाई) को रोहित ईडी के सामने उपस्थित हुए थे, जिसके बाद आज खुद पूर्व मंत्री सवालों का सामना करने पहुंचे। यह पूरी कवायद झारखंड के चर्चित शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी से जुड़े कथित शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। ईडी  इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि शराब सिंडिकेट के जरिए अवैध कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल किस स्तर पर खेला गया और इसमें किन-किन रसूखदारों को फायदा पहुँचाया गया। चूंकि रामेश्वर उरांव राज्य के वित्त मंत्री रह चुके हैं, इसलिए इस मामले में उनकी गवाही और पूछताछ को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक,ईडी  के अधिकारी पूर्व मंत्री से योगेंद्र तिवारी से उनके संबंधों, वित्तीय लेन-देन और विभागीय फैसलों को लेकर लंबी पूछताछ कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि इस मैराथन पूछताछ के बाद झारखंड की सियासत में क्या नया मोड़ आता है।